Sunday, February 13, 2011

फूल

हर पौधे की शोभा फूल ,
करता सबके दिल को कूल ॥
लाल गुलाबी सतरंगी बन ,
मिटा रहा है दिल के शूल ॥
इसको अपनी बगिया प्यारी ,
प्यारा है अपना माहौल ॥
जाति धर्म से क्या लेना है ,
धरती माता इसका मूल ॥
इसीलिए तो सबका प्यारा ,
राज- दुलारा अपना फूल ॥
क्या हम दे सकते है जैसी ,
खुशियाँ देता हर -पल फूल ॥ - - - उदय भान कनपुरिया

1 comment:

  1. आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा. हिंदी लेखन को बढ़ावा देने के लिए आपका आभार. आपका ब्लॉग दिनोदिन उन्नति की ओर अग्रसर हो, आपकी लेखन विधा प्रशंसनीय है. आप हमारे ब्लॉग पर भी अवश्य पधारें, यदि हमारा प्रयास आपको पसंद आये तो "अनुसरण कर्ता" बनकर हमारा उत्साहवर्धन अवश्य करें. साथ ही अपने अमूल्य सुझावों से हमें अवगत भी कराएँ, ताकि इस मंच को हम नयी दिशा दे सकें. धन्यवाद . आपकी प्रतीक्षा में ....
    भारतीय ब्लॉग लेखक मंच
    डंके की चोट पर

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